आगरा की महिला कारोबारी ने मॉस यानी काई को होम फ्रेंडली बना दिया है, काई से घर की सजावट के आइटम तैयार किए हैं, यूनिक राखियां भी गिफ्ट में हैं… – UP News Express

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आगरा की महिला कारोबारी ने मॉस यानी काई को होम फ्रेंडली बना दिया है, काई से घर की सजावट के आइटम तैयार किए हैं, यूनिक राखियां भी गिफ्ट में हैं…

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पूजा कोचर ऐसे बनीं प्रकृति प्रेमी

बीते डेढ़ साल से कोरोना महामारी ने हमें प्रकृति की अहमियत बताई है. प्रकृति हमारे लिए कितनी जरूरी है ये हमने कोरोनाकाल में अच्छी तरह से समझ लिया है. दुनिया आज जान चुकी है कि प्रकृति बचाने के लिए प्रकृति प्रेमी बनना कितना जरूरी है. आज की ये खबर भी एक ऐसी ही प्रकृति प्रेमी की है जिनके जीवन में कुछ साल में ही जीवन बदलने वाला बदलाव हुआ है. आगरा के जयपुर हाउस में रहने वाली पूजा कोचर दो साल से प्रकृति प्रेमी बन गई हैं. यह सब दो साल पहले शुरू हुआ. पूजा कहती हैं कि तीन साल पहले मैं बगीचे में जाती थी तो अगर कोई मुझसे पौधों और पेड़ों के बारे में पूछता, तो मैं बस इतना ही कहती कि यह सब मेरे पति का काम है और मुझे कोई जानकारी नहीं है. वह कहती हैं कि मैं अपने परिवार में अकेली थीं, जो प्रकृति प्रेमी नहीं थीं, लेकिन केवल दो से तीन वर्षों के अंतराल में ही वे प्रकृति को बहुत अच्छी तरह से समझने लगी हैं.

पूजा बताती हैं कि करीब ढाई साल पहले मैं अपने एक दोस्त से मिलने के लिए गई थी तोवहां मुझे गिफ्ट के रूप में एक टेरारियम मिला. इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रजातियों को लगाकर एक सुंदर वस्तु बनाने के लिए किया गया था. उस समय, मुझे यह भी नहीं पता था कि यह क्या था और मुझे उससे इसके बारे में पूछना था लेकिन मुझे अभी भी इसका उद्देश्य समझ में नहीं आया. बाद में, जब मैं घर वापस आई, तो मैंने इसके बारे में गुगल किया और आखिरकार समझ गया कि यह क्या है.

मॉस यानी काई से तैयार किए सजावट के आइटम

पूजा कोचर ने टेरारियम में से देखकर मॉस यानी काई से सजावट के आइटम तैयार करना शुरू किए. पूजा कहती हैं कि मैंने घर पर ही प्रकृति से प्राप्त उत्पादों से चीजें बनाना शुरू किया. शुरुआत में, मैं अपनी बेटी से मेरी मदद करने के लिए कहती थी, लेकिन धीरे-धीरे मैं आत्मनिर्भर हो गई क्योंकि वह मुझसे कहती थी कि, “माँ, अगर आप खुद सीखते हैं, तो आप और भी बेहतर कर सकते हैं!”

कई बेहतरीन आइटम्स किए तैयार

पूजा कोचर ने अपनी क्रिएटिविटी को और निखारा और उन्होंने मौस के जरिए कई गिफ्ट आइटम तैयार किए हैं. इनमें दीवार घड़ी, सीनरी, फोटो फ्रेम, पॉट आदि शामिल हैं. वे अब गिफ्ट के रूप में इनहीं का इस्तेमाल करती हैं. पूजा कहती हैं कि इसके जरिए मैं प्रकृति के करीब आई हूं और मैंने अपनी इस क्रिएटिविटी का नाम भी प्रकृति ही रखा है. उनका कहना है कि वोकल फोर लोकल के तहत बनाई गई अपनी इस क्रि​एटिविटी के जरिए मैं आगरा के लोगों को ग्रीनरी की तरफ लाना चाहती हूं. उनका कहना है कि लोग गिफ्ट के तौर पर महंगे—महंगे बुके देते हैं जो कि दो—चार दिन में ही खराब हो जाते हैं. ऐसे में मॉस से बनाए गए ये टेरारियम लोग अगर गिफ्ट में दें तो ये सजावट के तौर पर काम भी आएंगे और खूबसूरत भी लगते हैं.

 

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