शरद पवार ही दे सकते हैं देश के विकास को सही दिशा :-के.के.शर्मा – UP News Express

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 शरद पवार ही दे सकते हैं देश के विकास को सही दिशा :-के.के.शर्मा

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मुंबई-श्रीकेश चौबे/:

एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव श्री कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा है कि  इसह समय  एनसीपी प्रमुख शरद पवार देश में विपक्ष के सबसे अनुभवी नेता  हैं। उनमें देश का नेतृत्व करने के सभी गुण हैं. आज एक विशेष बातचीत में श्री शर्मा ने कहा कि विविधताओं  वाले इस देश में शरद पवार ही सद्भाव कायम कर सकते हैं और देश के विकास को सही दिशा दे  सकते हैं . उन्होंने कहाकि 55 सालों के राजनीतिक अनुभव के साथ, शरद पवार 1967 से एक भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं हारे हैं। चार बार सीएम बने, साथ ही तीन बार केंद्रीय मंत्री बने, राज्य और केंद्र में विपक्ष के नेता, संसदीय दल के नेता के रूप में कार्य किया और अन्य शीर्ष पदों पर सेवाएं दी हैं। इंदिरा गांधी या अटल बिहारी वाजपेयी के कद के कई  नेताओं की तरह, पवार का शीर्ष राजनीतिक नेताओं के साथ व्यक्तिगत रूप से अच्छा तालमेल है।

श्री शर्मा ने कहा कि दिग्गज नेता शरद पवार के नेतृत्व में विपक्ष भाजपा को केंद्र की सत्ता से आसानी से बेदखल कर सकता है, इसलिए देश के सभी विपक्षी दलों को श्री पवार के नेतृत्व में एकजुट हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे शरद पवार ही हैं जिन्होंने भाजपा के विजय रथ को महाराष्ट्र में रोक दिया। उन्होंने कहा कि श्री पवार में भाजपा को  हराने के साथ साथ देश को चलाने और उसे विकास की राह पर  ले जाने की भी क्षमता है। उन्होंने कहा कि जो महाराष्ट्र आज सभी राज्यों का रोल मॉडल बना हुआ  है उसे समृद्ध बनाने में भी श्री पवार की महत्वपूर्ण भूमिका है।केंद्र में भी श्री पवार को सबसे सफल कृषि मंत्री माना  जाता है। आज उन जैसा अनुभवी नेता पूरे देश में मिलना मुश्किल है। आज के दौर में शरद पवार  विपक्षी दलों के सबसे ज्यादा स्वीकार्य नेता हैं.
गौरतलब है कि शरद पवार को मराठा क्षत्रप कहा जाता है.  भारतीय राजनीति में उनका कद बहुत बड़ा है. कुछ इस तरह भी कि पिछले 03-04 दशकों की भारतीय राजनीति को उनसे अलग करके देखा ही नहीं जा सकता. उनकी भूमिका किसी ना किसी तौर पर नजर आएगी ही आएगी. चाहे वो केंद्र और महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी के साथ हो या विपक्ष में. महाराष्ट्र में उनकी पार्टी एक बड़ी ताकत है.  महाराष्ट्र की सियासत के बल पर वो केंद्र की पालिटिक्स में भी खास रोल निभाते रहे हैं और निभा रहे हैं.वैसे पवार का खुद सियासी करियर 50 सालों से भी ज्यादा लंबा है. हालांकि वो क्रिकेट की सियासी पिच के भी धुरंधर रहे हैं. मुंबई क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष पद पर वो दस साल से भी ज्यादा समय तक बने रहे तो साल 2005 से 2008 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और साल 2010 से 2012 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल के मुखिया भी रहे.
पिछले 50 साल से लगातार महाराष्ट्र की राजनीति में अंगद की तरह पैर जमाए शरद पवार राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर चार बार शपथ ले चुके हैं. साल 2004 से लेकर 2014 तक वो मनमोहन सिंह की कैबिनेट में कृषि मंत्री रहे. इसके अलावा पवार केंद्र में रक्षा मंत्री के तौर पर भी काम कर चुके हैं.शरद पवार के राजनीतिक और व्यावहारिक आचरण की ही वजह से सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष में भी उनके संबंध हमेशा अच्छे रहे. मौजूदा मोदी सरकार ने उन्हें साल 2017 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मानित सिविलियन पुरस्कार माना जाता है..शरद पवार की राजनीति की विशेषता शुरुआती दौर से ही सूझबूझ से भरी रही है. यही वजह रही कि साल 1967 में वो एमएलए चुने गए, तब उनकी उम्र महज 27 साल थी. शरद पवार उसके बाद लगातार बुलंदियों को छूते रहे. सियासत में उनके शुरुआती संरक्षक तत्कालीन दिग्गज नेता यशवंत राव चव्हाण थे. लेकिन सियासी हवा को भांपना और अपने नीचे की जमीन को मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी खासियत है.

इसी सूझबूझ और आत्मविश्वास के चलते इमरजेंसी के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी से बगावत की. कांग्रेस छोड़ी. साल 1978 में जनता पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई. राज्य के मुख्यमंत्री बने.  साल 1980 में इंदिरा सरकार की जब वापसी हुई तो उनकी सरकार बर्खास्त कर दी गई.  1983 में शरद पवार ने कांग्रेस पार्टी सोशलिस्ट का गठन किया ताकि प्रदेश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाकर रख सकें.उस साल हुए लोकसभा चुनाव में शरद पवार पहली बार बारामती से चुनाव जीते लेकिन साल 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को मिली 54 सीटों पर जीत ने उन्हें वापस प्रदेश की राजनीति की ओर खींच लिया. शरद पवार ने लोकसभा से इस्तीफा देकर विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व किया.साल 1987 में वो वापस अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापस आ गए. राजीव गांधी के नेतृत्व में आस्था जता कर उनके करीब हो गए. शरद पवार को साल 1988 में शंकर राव चव्हाण की जगह सीएम की कुर्सी मिली. चव्हाण को साल 1988 में केन्द्र में वित्त मंत्री बनाया गया.

1990 के विधानसभा चुनाव में 288 सीटों में 141 पर कांग्रेस की जीत हो पाई थी लेकिन राजनीति के माहिर खिलाड़ी शरद पवार ने 12 निर्दलीय विधायक की मदद से सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की. ऐसा कर वो तीसरी बार सीएम बनने में कामयाब रहे. लेकिन साल 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद शरद पवार का नाम उन तीन लोगों में आने लगा, जिन्हें कांग्रेस के अगले प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा था. इन तीन नामों में नारायण दत्त तिवारी, पी वी नरसिम्हा राव और शरद पवार शामिल थे.नारायण दत्त तिवारी साल 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार की वजह से पीएम बनने से रह गए. ये मौका दूसरे सीनियर नेता पी वी नरसिम्हा राव को मिल गया जबकि शरद पवार को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली. लेकिन फिर शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए वापस भेजा गया.6 मार्च 1993 को सुधाकर राव नाइक को हटा शरद पवार को सीएम बनाया गया गया. साल 1998 के मध्यावधि लोकसभा चुनाव के बाद शरद पवार विपक्ष के नेता चुने गए.

साल 1999 में जब 12 वीं लोकसभा भंग हुई तो शरद पवार ने  नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का गठन किया. शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर पार्टी जरूर बनाई लेकिन साल 1999 के महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में जनादेश न मिलने पर कांग्रेस से हाथ मिलाकर सरकार भी बना ली.साल 2004 से साल 2014 तक पवार लगातार केन्द्र में मंत्री रहे तबसे लेकर अभी तक महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ वहां के लोकसभा सीट पर कांग्रेस से तालमेल बनाए रखा. साल 2014 का लोकसभा चुनाव शरद पवार ने ये कहकर नहीं लड़ा कि वो युवा नेतृत्व को पार्टी में आगे लाना चाहते हैं.राजनीति में सधे खिलाड़ी की तरह एक-एक चाल सोच-समझकर चलने वाले शरद पवार फिर से महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्र में हैं. हाल में जब महाराष्ट्र में चुनाव हुए तो जिस तरह उन्होंने शिव सेना के साथ मिलकर सरकार बनाई, उससे बीजेपी के दिग्गजों को करारी मात का स्वाद चखना पड़ा.पिछले कुछ समय से वो देश की राजनीति में विपक्ष के दमदार नेता और कांग्रेस के सहयोगी के तौर पर उभरे हैं .

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