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कोई भी लल्लू पंजू आए और पत्रकारों का दमन करें यह कब तक चलेगा…??? मुख्यमंत्री जी

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कृष्णा पंडित की कलम से

सबसे बड़ी बात कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती है जिसकी वजह से पूरे समाज को शर्मसार होना पड़ता है आपको बताते चलें अधिकारी यह है क्या इनकी कार्य शैली क्या है इनकी ड्यूटी क्या होती है यह जनता के प्रति कितनी उत्तरदायित्व रखते हैं यह खुद नहीं जानते कुछ तो पढ़े लिखे होते हैं कुछ अनपढ़ गवांंर उठा,ऊ जो इधर उधर से नौकरी पा लेते हैं इतना गुरुर और घमंड सरकारी नौकरी नहीं देती बल्कि मिल रहा पैसा और इनका अधिकार क्षेत्र जिससे बढ़ी परिधि के साथ लंबी कमाई करते हैं यही वह मुख्य वजह है की इनको अपनी ड्यूटी याद नहीं रहती अपना अधिकार क्षेत्र भूल जाते हैं और फिर अकर्मण्यता में ऐसी शर्मसार घटना को अंजाम देते हैं जिससे समाज को शर्मसार होना पड़ता है फिर माफी मांग लेते हैं या लिखित तौर पर एक छोटी सी मुकदमा कायम कर विभाग इनको दूसरे जगह तबादला या ट्रांसफर कर देता है क्या किसी व्यक्ती के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने के बाद इनका इलाज पब्लिक के बीच में उसी तरीके से जैसा इसने अपनाया नहीं होना चाहिए !

जागृति और नियम कानून सिर्फ उसके लिए क्यों जो मार खाता है ऐसे गंदेहीन व्यक्ति जो अपने पैसे और अपने पद का दुरुपयोग करते हैं इनको तो सरेराह जूते से जनता का अभिवादन नहीं होना चाहिए क्योंकि पूरी कार्यकाल के दौरान इन्होंने कभी ड्यूटी नहीं किया होता है सिर्फ मात्र खानापूर्ति कर अपने मासिक वेतन का इंतजार करते हैं या इधर उधर मुंह मारते हैं आज भ्रष्टाचार किसी से छुपा नहीं है लेकिन यह भ्रष्टाचारी नंगा नाच कर रहे हैं सड़कों पर आम जनता के साथ उन्नाव में घटी घटना साफ जाहिर होता है कि यह सीडीओ देवांशु पटेल कभी भी अधिकारी नहीं हो सकता दूसरी बात इसकी पूरी ड्यूटी किसी के तलवे चाटने और जी हजूरी से चलती है एक पत्रकार जो अपनी ड्यूटी पर है जो सबकी समस्याओं को दर्पण की तरह अपने को पीसते हुए लाने का कार्य करता है उसको इसने मारकर अपनी घृणित मानसिकता जाहिर की है ऐसे में हमारे समाज को सोचना चाहिए कि क्या ऐसे लोग जो सामाजिक पटल पर समाज के दोषी हैं उनका इलाज सिर्फ कानूनी हो या समाज भी उनको उनका अभिवादन अपने तरीके से किया जाना चाहिए दूसरी तौर पर एक पत्रकार समाज जो ऐसे लोगों को कभी बर्दाश्त नहीं करता जिसकी जमीर और कलम जिंदा है ऐसे भेड़ियों को उनकी धौंस और पोस्ट उनके अंदर घुसेड़ने का काम करता है ऐसे अधिकारियों के लिए कानून कयादा द्वार बिल्कुल सही है लेकिन इनकी काली करतूत और काली कमाई जिसके माध्यम से यह ऐसी हरकत कर बैठते हैं उस पर नकेल कस इनकी जीवन की सच्चाई को बाहर लगता है और पत्रकार संगठनों में अपने साथी के साथ हुए बर्ताव पर बहुत रोष है यदि यह सड़कों पर उतरेंगे तो सरकार और प्रशासन के लिए बहुत नुकसान देय होगा सबसे बड़ी बात वहां मौजूद पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी और क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में पत्रकार को पीटा जाता रहा और यह अपनी वर्दी शान से खड़ा होकर ऊंचा करते रहे साहब आप जैसे लोग ही समाज को शर्मसार करते हैं जहां आपको लड़ना होता है वहां पीठ दिखा कर भाग जाते हैं जहां आपको सुरक्षा देना होता है वहां सिर्फ खानापूर्ति करते हैं और आपके अंदर तो अब दमखम दिखती ही नहीं है विकास दुबे जैसे लोग हजारों की संख्या में उपस्थित पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होता है आप संरक्षण के माध्यम से अपराधियों को आका बना देते हैं वर्दी आपको जनता की सुरक्षा के लिए मिली होती है जिसकी पैसे से आपका घर परिवार चलता है आपको कभी यह दिखता नहीं लेकिन जी हजूरी और अगुवाई सिर्फ नेता और अपने अधिकारियों की करते हैं शर्म करो जिस दिन जनता जाग जाएगी और तुम्हारे इन करतूतों को जान जाएगी फिर क्या होगा यह तुम्हें अंदाजा भी नहीं होगा हम तो कलमकार हैं समाज की बुनियाद और ढांचे के रूप में हर मौसम में खड़े रहने की आदत है तुम थप्पड़ जरूर मार सकते हो लेकिन कमजोर नहीं कर सकते !

तुम्हारे जैसे गद्दार और नामर्द अधिकारी हमारी पत्रकारिता की क्षेत्र में नपुंसक के तौर पर देखे जाते हैं जो एक असहाय और सम्मानित सा जीवन जीने वाला पत्रकार को पब्लिकली दौड़ाकर पीट दिया !

हिम्मत है तो कभी यूपी की उन बदमाशों पर हाथ लगा कर दिखा जिनके गेट के बाहर बड़े-बड़े बोर्ड टांगे हैं यही नहीं जिनके यहां जाकर तुम तलवे चाटते हो यूपी में ऐसे सैकड़ों सिरफिरे हैं जहां तुम्हारा अधिकारी सिर्फ नाक रगड़ता है जाकर और कोशिश करता है कि बदमाशों से उसका सामना ना हो महोदय सीडीओ देवांशु पटेल तुम जब कभी दोबारा ऐसी हरकत करोगे ना तुम्हें कोई सुनने वाला मिलेगा ना कोई देखने वाला ऐसा नहीं है कि पत्रकार कमजोर और सिर्फ कलम से ही होता है उसके भी बहुत से हाथ पैर होते हैं जिसका इस्तेमाल करना वह नहीं जानता है जिस दिन वह कर दिया तुम जैसे अधिकारियों का क्या होगा यह गंभीर और सोचनीय होगा…!

आग से खेलोगे तो खुद का घर जलाओगे, पत्रकारों को छेड़ेगो तो दफन हो जाओगे

यदि इस सीडीओ को बर्खास्त नहीं किया जाता नेता को जेल नहीं भेजा था तो संगठन सड़कों पर होगा फिर सरकार की जिम्मेदारी होगी कि ऐसे अधिकारियों पर नकेल कैसे कसनी है..!!

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