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भारत की वैक्सीन पर ब्राज़ील में बवाल

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एन0के0शर्मा

ब्राज़ील में भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सीन को लेकर घमासान मचा हुआ है।

आरोप है कि ब्राज़ील की जायर बोलसोनारो सरकार ऊंची क़ीमत पर भी भारत की वैक्सीन ख़रीदने के सौदे पर आगे बढ़ रही थी।

ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि उन पर दबाव था कि ऊंची क़ीमत पर भी भारत की वैक्सीन का सौदा किया जाए।

इस पूरे विवाद में ब्राज़ील के राष्ट्रपति पर सवाल उठ रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा है कि ब्राज़ील में न तो भारत बायोटेक की वैक्सीन आई है और न ही कोई भुगतान किया गया है।

ब्राज़ील में भारत बायोटेक से वैक्सीन के सौदे की जाँच चल रही है। ब्राज़ील के संघीय अभियोजकों ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की दो करोड़ डोज़ के लिए 32 करोड़ डॉलर के सौदे की जाँच शुरू कर दी है।

कहा जा रहा है कि फ़ाइज़र ने ब्राज़ील को पिछले साल कोवैक्सीन से कम क़ीमत में वैक्सीन ऑफर किया था, लेकिन वहाँ की सरकार ने इसके प्रति उदासीनता दिखाई थी।

ब्राज़ील के राष्ट्रपति की सफ़ाई
शुक्रवार को ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा, ”हमने कोवैक्सीन पर न तो एक पैसा ख़र्च किया है और न ही हमें कोवैक्सीन की एक भी डोज़ मिली है। इसमें भ्रष्टाचार कहाँ से आ गया?”

बोलसोनारो ने कहा कि उनकी सरकार में कोई भी भ्रष्टाचार की बात सामने आएगी तो वे कार्रवाई करेंगे। ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत बायोटेक वैक्सीन की क़ीमत दूसरे देशों की तरह ही ब्राज़ील में है।

राष्ट्रपति ने कहा, ”सरकार वैक्सीन का सौदा तभी करती है जब फेडरल हेल्थ अथॉरिटी से उस वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलती है। कोवैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी अभी नहीं मिली है। हालांकि तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए ब्राज़ील की पार्टनर कंपनी के ज़रिए मंज़ूरी मिली है।”

भारत बायोटेक का कहना है कि विदेशी सरकारों के लिए कोवैक्सीन की प्रति डोज़ की क़ीमत 15-20 डॉलर है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।

रॉयटर्स के अनुसार, भारत बायोटेक ने कहा है कि इसी क़ीमत में ब्राज़ील के साथ समझौत हुआ है। ब्राज़ील ने भारत बायोटेक के साथ फ़रवरी में ही सौदे पर हस्ताक्षर किया था लेकिन भारत बायोटेक के अनुसार ख़रीदारी ऑर्डर को मंज़ूरी नहीं मिलने के कारण कोई खेप अभी नहीं गई है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को आगाह किया था कि भारत में बनी कोवैक्सीन ख़रीदने का दबाव था।

रॉयटर्स से ये बात उस बैठक में शामिल हुए एक सांसद ने बताई है। एक सीनेट पैनल, ब्राज़ील में कोविड महामारी से निपटने में सरकार कितनी कारगर रही, इसे लेकर जाँच कर रही है। बुधवार को इस पैनल ने लॉजिस्टिक डिपार्टमेंट अधिकारी लुइस रिकार्डो मिरांडा को पूछताछ के लिए बुलाया था।

सीनेट कमिटी और प्रॉसिक्युटर्स इस बात की जाँच कर रहे हैं कि सरकार क्यों भारत से महंगी वैक्सीन का सौदा चाहती थी और पिछले साल फ़ाइज़र की पेशकश को क्यों ठुकरा दिया था।

मिरांडा ने कमिटी के सामने कहा है कि उन पर राष्ट्रपति बोलसोनारो के क़रीबी सहयोगी पू्र्व स्वास्थ्य मंत्री एडवर्डो पाज़ुएलो के नज़दीकी एलेक्स लिआल मारिन्हो का दबाव था। पूछताछ के दस्तावेज़ों को रॉयटर्स ने देखा है।

ब्राज़ील में बुरी तरह से घिरे हुए हैं राष्ट्रपति बोलसोनारो

ब्राज़ील के राष्ट्रपति बोलसोनारो को कोरोना, मास्क उतारा

पिछले महीने ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के ख़िलाफ़ देश भर में कोविड-19 संकट के प्रबंधन को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था। ब्राज़ील की राजधानी ब्रासिलिया में कांग्रेस के सामने हज़ारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए थे और उन्होंने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग लगाने के साथ पर्याप्त वैक्सीन की मांग की थी।

ब्राज़ील में रियो डी जेनेरो समेत कई अन्य बड़े शहरों में विरोध-प्रदर्शन हुए थे। कोरोना महामारी से निपटने में सरकार का जो रुख़ रहा, उससे बोलसोनारो की लोकप्रियता कम हुई है। ब्राज़ील में कोरोना से अब तक चार लाख 70 हज़ार लोगों की जान गई है। अमेरिका के बाद सबसे ज़्यादा मौतें यहीं हुई हैं। ब्राज़ील दुनियां का तीसरा देश है, जहाँ कोरोना के सबसे ज़्यादा एक करोड़ 60 लाख मामले दर्ज किए गए हैं।

ब्राज़ील के प्रसिद्ध ब्यूटानतन इंस्टिट्यूट के प्रमुख ने सीनेट की समिति के सामने कहा था कि राष्ट्रपति बोलसोनारो ने टीकाकरण अभियान की शुरुआत में देरी की।

डॉक्टर डाइमस कोवास ने पिछले साल अगस्त महीने में कहा था कि ब्यूटानतन ने कोरोनावैक वैक्सीन की 10 करोड़ डोज की आपूर्ति का ऑफ़र दिया था।

चीन की सिनोवैक के लाइसेंस के तहत ब्यूटानतन इंस्टिट्यूट ये वैक्सीन बनाने वाला था।

डॉक्टर डाइमस ने कहा था कि उनके इस प्रस्ताव में ये वादा भी किया गया था कि 50 लाख की पहली खेप दिसंबर की शुरुआत तक दे दी जाएगी।

डॉक्टर डाइमस ने कहा कि इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति बोलसोनारो ने कह दिया था कि उनकी सरकार चीन की वैक्सीन कभी नहीं ख़रीदेगी। डॉ डाइमस ने कमिटी के सामने कहा, “ब्राज़ील टीकाकरण की शुरुआत करने वाला पहला देश बन सकता था। लेकिन सरकार की नीतियों के कारण ऐसा नहीं हो पाया।”

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